मात्राएँ और संयुक्ताक्षर कैसे टाइप करें: ि की उलझन और हलंत का खेल
हिंदी में टाइप कैसे करें, इसका सबसे उलझा हिस्सा मात्राएँ हैं। "कि" लिखते समय पेन से हम पहले ि की लकीर खींचते हैं, फिर क। इसलिए नए सीखने वाले कीबोर्ड पर भी पहले ि दबाने की कोशिश करते हैं — और स्क्रीन पर अजीब-सा अक्षर दिखता है। कारण सरल है: कंप्यूटर हिंदी को उच्चारण के क्रम में संभालता है, दिखावट के क्रम में नहीं।
नियम 1: पहले व्यंजन, फिर मात्रा
हर मात्रा व्यंजन के बाद टाइप होती है, चाहे वह स्क्रीन पर आगे दिखे, पीछे, ऊपर या नीचे। कि = क (K) + ि (F)। की = क + ी (R)। के = क + े (S)। कौ = क + ौ (Q)। फ़ॉन्ट ख़ुद तय करता है कि ि को व्यंजन के बाईं ओर कैसे बनाना है।
इसका एक फ़ायदा भी है: टाइपिंग की लय हमेशा "दायाँ हाथ – बायाँ हाथ" रहती है, क्योंकि INSCRIPT पर व्यंजन दाएँ और मात्राएँ बाएँ हाथ पर हैं। यही बात KPC Typing का टाइपिंग इंजन भी जाँचता है — वह दिखने वाले आकार की जगह अक्षरों का असली (Unicode) क्रम मिलाता है, इसलिए गलत क्रम तुरंत पकड़ में आ जाता है।
नियम 2: आधा अक्षर = व्यंजन + हलंत
संयुक्ताक्षर के लिए पहले व्यंजन के बाद ् (हलंत, D कुंजी) दबाएँ, फिर अगला व्यंजन:
- क्या = क ् य ा
- प्यार = प ् य ा र
- स्कूल = स ् क ू ल
- नमस्ते = न म स ् त े
- बच्चा = ब च ् च ा
फ़ॉन्ट अपने-आप आधा रूप या जुड़ा हुआ आकार बना देता है। आपको बस हलंत सही जगह रखना है।
क्ष, त्र, ज्ञ, श्र
ये चार इतने आम हैं कि INSCRIPT ने इन्हें एक-एक कुंजी दे दी है: ज्ञ = Shift+5, त्र = Shift+6, क्ष = Shift+7, श्र = Shift+8। चाहें तो इन्हें लंबे रास्ते से भी बना सकते हैं (क्ष = क ् ष), नतीजा एक ही रहेगा।
र के रूप: प्र और कर्म
"प्र" में र नीचे लगता है: प ् र। "कर्म" में र ऊपर (रेफ) बनता है: क र ् म। फिर वही नियम — जैसा बोलते हैं, वैसा टाइप करें। INSCRIPT में Shift+3 से सीधे ्र और Shift+4 से र् भी मिल जाता है।
अनुस्वार, चंद्रबिंदु और विसर्ग
ं (X) और ँ (Shift+X) भी मात्रा की तरह अक्षर के बाद आते हैं: हिंदी = ह ि ं द ी, माँ = म ा ँ। विसर्ग ः (Shift + -) दुःख जैसे शब्दों में आता है। इन चिह्नों से जुड़ी आम चूकों के लिए हिंदी टाइपिंग की आम गलतियाँ देखें।
अभ्यास कैसे करें
दिन 5 के पाठ में बारहखड़ी (क का कि की कु कू के कै को कौ कं) और संयुक्ताक्षर वाले शब्द हैं। हर अक्षर को बोलते हुए टाइप करें — "क… ि"। दो-तीन दिन में उँगलियाँ यह क्रम अपने-आप पकड़ लेती हैं।