हिंदी टाइपिंग टेस्ट, मुफ्त टाइपिंग अभ्यास, गति बढ़ाने के तरीके, INSCRIPT कीबोर्ड और बच्चों व छात्रों के लिए टाइपिंग — हिंदी में टाइप करने वालों के लिए।
KPC Typing की सभी सुविधाओं का परिचय: 10 दिन का कोर्स, ऑन-स्क्रीन INSCRIPT कीबोर्ड, लेआउट इम्यूलेशन, टाइपिंग टेस्ट और मिनी गेम।
KPC Typing और पाँच जाने-माने टाइपिंग टूल की तथ्यात्मक तुलना, और यह कि हर टूल किस तरह के विद्यार्थी के लिए उपयुक्त है।
रोज़ कंप्यूटर पर काम करने वाले बहुत से लोग मानते हैं कि उनकी हिंदी टाइपिंग ठीक-ठाक है। दो मिनट का हिंदी टाइपिंग टेस्ट अक्सर कुछ और बताता है — और वहीं से असली सुधार शुरू होता है।
पहली नज़र में INSCRIPT कीबोर्ड बेतरतीब लगता है। असल में इसके पीछे एक साफ़ तर्क है, और उसे समझ लेने के बाद आधा कीबोर्ड अपने-आप याद हो जाता है।
हिंदी टाइपिंग सीखना उतना मुश्किल नहीं जितना दिखता है। मुश्किल यह है कि ज़्यादातर लोग सही क्रम में नहीं सीखते — और दो उँगलियों की आदत बाद में छोड़नी पड़ती है।
हिंदी टाइपिंग में सबसे ज़्यादा उलझन दो जगह होती है: छोटी इ की मात्रा (ि) और आधे अक्षर। दोनों का नियम एक ही है — आप वैसे टाइप करते हैं जैसे बोलते हैं, वैसे नहीं जैसे लिखा दिखता है।
हिंदी टाइपिंग सीखने से पहले एक फ़ैसला करना पड़ता है: कौन-सा कीबोर्ड लेआउट। गलत चुनाव का मतलब है महीनों की मेहनत के बाद फिर से शुरुआत।
दो उंगलियों से टाइप करने वाला व्यक्ति कितना भी अभ्यास कर ले, एक सीमा पर अटक जाता है। 10 उंगलियों से टाइपिंग उस सीमा को हटा देती है — और इसे कोई भी सीख सकता है।
कई लोग महीनों तक रोज़ टाइप करते हैं और फिर भी गति वहीं की वहीं रहती है। कारण अक्सर मेहनत की कमी नहीं, अभ्यास का गलत तरीका होता है।
बच्चे लंबे पाठ से जल्दी ऊब जाते हैं, पर खेल में घंटों लगे रहते हैं। टाइपिंग गेम इसी आदत का फ़ायदा उठाते हैं — खेल भी, अभ्यास भी।
एक समय था जब टाइपिंग सीखने के लिए CD वाला सॉफ़्टवेयर या कोचिंग चाहिए होती थी। आज ब्राउज़र खोलिए और अभ्यास शुरू — सवाल बस इतना है कि अच्छा मुफ़्त टूल कैसे पहचानें।
एक मिनट का टेस्ट आपकी सबसे तेज़ गति दिखाता है, दस मिनट का टेस्ट आपकी असली गति। दोनों का अपना काम है।
हिंदी में टाइप करने के लिए नया कीबोर्ड ख़रीदने की ज़रूरत नहीं। सही सेटिंग, सही फ़ॉन्ट और थोड़ा अभ्यास — बस इतना चाहिए।
परीक्षा, प्रोजेक्ट और बाद में नौकरी — छात्रों के लिए टाइपिंग अब ज़रूरी हुनर है। अच्छी बात यह कि चार हफ़्ते की नियमित मेहनत से नींव पक्की हो जाती है।
कई सरकारी पदों पर लिखित परीक्षा पास करने के बाद भी टाइपिंग टेस्ट में लोग छँट जाते हैं। अच्छी ख़बर: यह परीक्षा का सबसे "पक्का" हिस्सा है — मेहनत का सीधा फल मिलता है।
हिंदी टाइपिंग में गलतियाँ ज़्यादातर कुछ गिने-चुने कारणों से होती हैं। इन्हें पहचान लें, तो शुद्धता कुछ ही दिनों में सुधर जाती है।
ऑनलाइन टाइपिंग की सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि अभ्यास कहीं से भी हो सकता है। पर यही आज़ादी अक्सर बेतरतीब अभ्यास में बदल जाती है।
टाइपिंग स्पीड जानने के लिए पैसे देने या खाता बनाने की ज़रूरत नहीं। एक मुफ्त टाइपिंग टेस्ट दो मिनट में वही बता देता है।
एक अच्छा टाइपिंग कोर्स बताता है कि आज क्या सीखना है और कल क्या। यही क्रम बेतरतीब अभ्यास और असली प्रगति का फ़र्क है।
अच्छा टाइपिस्ट किसी भी कीबोर्ड पर टाइप कर लेता है। फिर भी सीखते समय सही टाइपिंग कीबोर्ड उंगलियों की थकान और गलतियाँ दोनों घटाता है।
बच्चे हिंदी पढ़ना-लिखना स्कूल में सीखते हैं; कीबोर्ड पर वही अक्षर बनाना उनके लिए एक नया खेल हो सकता है — अगर तरीका सही हो।
पाठ से ऊब हो जाए तो अभ्यास छोड़ने की ज़रूरत नहीं — बस उसे खेल में बदल दीजिए।
टाइपिंग सीखने का सबसे कठिन हिस्सा पहला हफ़्ता है — जब नया तरीका पुराने दो-उंगली वाले तरीके से भी धीमा लगता है।
कंप्यूटर पर टाइप करना आज लगभग हर नौकरी की ज़रूरत है। पहली बार सीखने वालों के लिए यह गाइड बिलकुल शुरुआत से है।
कीबोर्ड पर तेज़ होना असल में एक नक्शा याद करना है — उंगलियों के लिए। ये छोटे अभ्यास वह नक्शा जल्दी पक्का करते हैं।
हिंदी कीबोर्ड पर अंग्रेज़ी से अलग चुनौतियाँ हैं: मात्राएँ, हलंत, नुक़्ता। इन्हीं के लिए अलग ड्रिल चाहिए।
हिंदी टाइपिंग स्पीड टेस्ट का अंक एक दिन की तस्वीर है। असली कहानी हफ़्तों के अंकों की कतार बताती है।
"मेरी टाइपिंग स्पीड ठीक है या नहीं?" — इसका जवाब एक अंक से नहीं, तुलना से मिलता है।
एक मिनट में थकान नहीं आती, इसलिए यह टेस्ट आपकी सबसे तेज़ गति दिखाता है।
पाँच मिनट में वह सब दिखता है जो एक मिनट में छिप जाता है: थकान, भटकता ध्यान और कठिन शब्दों पर अटकना।
दस मिनट का टेस्ट गति से ज़्यादा धैर्य और मुद्रा की परीक्षा है।
तेज़ टाइपिंग दिखती है, सटीक टाइपिंग काम आती है। अधिकतर परीक्षाएँ भी यही मानती हैं।
हिंदी टाइप करने के लिए अलग कीबोर्ड ख़रीदना ज़रूरी नहीं। फिर भी सीखते समय कुंजियों पर हिंदी अक्षर दिखें तो कई लोगों को आसानी होती है।
दफ़्तर या साइबर कैफ़े के कंप्यूटर पर सेटिंग बदलने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में ऑनलाइन हिंदी कीबोर्ड काम आता है।
"फ़ॉन्ट" बदलने से हिंदी टाइपिंग का तरीका भी बदल सकता है — यही बात सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करती है।
"namaste" लिखो और "नमस्ते" बन जाए — यह जादू जैसा लगता है। रोज़ के छोटे संदेशों के लिए यह सचमुच बढ़िया है; लंबे काम के लिए इसकी सीमाएँ हैं।
सीखते समय एक साफ़ चार्ट पास हो तो बार-बार अंदाज़ा नहीं लगाना पड़ता। यह रहा हिंदी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का पूरा नक्शा।